सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

हनुमानजी को तत्काल प्रसन्न करने के लिये उनके बारह नामों की स्तुति करें । By वनिता कासनियां पंजाब अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌।सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥भावार्थ:-अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत (सुमेरु) के समान कान्तियुक्त शरीर वाले, दैत्य रूपी वन (को ध्वंस करने) के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथजी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान्‌जी को मैं प्रणाम करता हूँ॥हनुमानजी से बड़ा भगवान का दूसरा कोई भक्त नहीं है। हनुमानजी अशरण की शरण, दीनजनों के सहाय, मंगलकारी और संकटहारी हैं। भक्तों के कष्ट से व्याकुल होकर उनके दु:ख-दारिद्रय, आधि-व्याधि तथा समस्त विपत्तियों को दूर करने के लिए वे सदा तैयार रहते हैं; इसलिए जो लोग हनुमानजी के नामजप का आश्रय लेते हैं वे उनकी कृपा से निहाल हो जाते हैं।आनन्दरामायण में दी गयी हनुमानजी के बारह नामों की स्तुति अद्भुत चमत्कारी हैं। इनका नित्य पाठ-स्मरण करने से मनुष्य कठिन-से-कठिन परिस्थितियों से ऐसे निकल जाता है जैसे गाय के खुर से बने गड्डे को लांघा हो। आवश्यकता केवल हनुमानजी और उनके नामों में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखने की है। आनन्दरामायण में दी गयी हनुमानजी के बारह नामों की स्तुति ।हनुमानंजनीसूनुर्वायुपुत्रो महाबल:।रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिंगाक्षोऽमितविक्रम:।। उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशन:। लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।।एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:।स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च य: पठेत्।।तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्।राजद्वारे गह्वरे च भयं नास्ति कदाचन।। (आनन्दरामायण ८।१३।८-११)हनुमानजी के बारह नाम और उनका अर्थ इस स्तुति में दिए गए बारह नाम हनुमानजी के गुणों को दर्शाते हैं। श्रीराम और सीताजी के लिए हनुमानजी ने जो सेवाकार्य किया, उन्हीं का वर्णन इन नामों में हैं–1. हनुमान–इन्द्र के वज्र से जिनकी बायीं हनु (ठुड्डी) टूट गयी है, उस टूटी हुई विशेष हनु के कारण वे ‘हनुमान’ कहलाते हैं।2. अंजनीसूनु–कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को प्रदोषकाल में अंजनादेवी के गर्भ से हनुमानजी का जन्म हुआ था इसलिए हनुमानजी ‘अंजनीसूनु’, ‘आंजनेय’ या ‘अंजनीसुत’ कहलाते हैं।3. वायुपुत्र–हनुमानजी वायुदेव के मानस औरस पुत्र हैं, इसलिए उन्हें ‘वातात्मज’, ‘पवनपुत्र’, ‘वायुनन्दन’ और ‘मारुति’ नामों से जाना जाता है।4. महाबल–हनुमानजी अत्यन्त बलशाली हैं। श्रीरामजी ने हनुमानजी के बल का अगस्त्यमुनि से वर्णन करते हुए कहा–’रावण और वाली के बल की कहीं तुलना नहीं है; परन्तु मेरा विचार है कि दोनों का बल भी हनुमानजी के बल की बराबरी नहीं कर सकता।’5. रामेष्ट–हनुमानजी भगवान श्रीरामजी के प्रिय भक्त हैं।6. फाल्गुनसख–फाल्गुन का अर्थ है अर्जुन और सख का अर्थ है मित्र अर्थात् अर्जुन के मित्र। महाभारतयुद्ध के समय हनुमानजी अर्जुन के रथ की ध्‍वजा पर विराजित थे। उन्‍होंने अर्जुन की सहायता की इसलिए उन्‍हें अर्जुन का मित्र कहा गया है।7. पिंगाक्ष–श्रीहनुमान के नेत्र थोड़ी लालिमा से युक्त पिंग (पीले) रंग के हैं।8. अमितविक्रम–अमित का अर्थ है बहुत अधिक और विक्रम का अर्थ है पराक्रमी। हनुमानजी ने अपने पराक्रम के बल पर ऐसे कार्य किए जिन्‍हें करना देवताओं के लिए भी कठिन था इसलिए उन्‍हें अमितविक्रम कहा गया है। ब्रह्मवैवर्तपुराण में हनुमानजी ने अपने पराक्रम के विषय में स्वयं गर्जना की है–’मैं इस विशाल लंका को वानरी के बच्चे के समान छोटा समझता हूँ। समुद्र को मूत्र के समान, समस्त पृथ्वी को छोटे मिट्टी के पात्र (सकोरे) के समान तथा असंख्य सैनिकों से युक्त रावण को चींटियों के झुंड के तुल्य मानता हूँ।’9. उदधिक्रमण–उदधिक्रमण का अर्थ है समुद्र को लांघने (अतिक्रमण करने) वाले। मनुष्य को जीवन में हर कदम पर संघर्ष करना पड़ता है। संघर्ष से भयभीत होने वाला व्यक्ति विजय से पहले ही पराजय स्वीकार कर लेता है। परन्तु प्रभु-विश्वासी मनुष्य को इन संघर्षों की लहरों पर भी आनन्द का संगीत सुनाई देता है। रामदूत हनुमान द्वारा समुद्र लांघने का कार्य हमारे मन में संघर्षों पर विजय पाने की प्रेरणाएं जगाता है।10. सीताशोकविनाशन–माता सीता के शोक का निवारण करने के कारण हनुमानजी को सीताशोकविनाशन कहा जाता है।11. लक्ष्मणप्राणदाता–जब रावण के पुत्र इंद्रजीत (मेघनाद) ने शक्ति का उपयोग कर लक्ष्‍मण को मूर्च्छित कर दिया, तब हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर आए थे। उसी बूटी के प्रभाव से लक्ष्‍मण को होश आया था; इसलिए हनुमानजी को लक्ष्‍मणप्राणदाता भी कहा जाता है।12. दशग्रीवदर्पहा–दशग्रीव यानी रावण और दर्पहा यानी घमंड तोड़ने वाला। दशग्रीवदर्पहा का अर्थ है रावण का घमंड तोड़ने वाला। हनुमानजी ने लंका जाकर सीताजी का पता लगाया और रावण के पुत्र अक्षयकुमार का वधकर लंकादहन किया। इस प्रकार हनुमानजी ने कई बार रावण का घमंड तोड़ा था। इसलिए इनको दशग्रीवदर्पहा भी कहा जाता है।बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रमहनुमानजी के बारह नामों के पाठ का फल जब मन किसी अज्ञात भय से घबराता हो, किसी अनहोनी की आशंका हो या कोई भीषण संकट उपस्थित हो गया हो तो हनुमानजी के इन बारह नामों का प्रात:काल सोकर उठने पर या रात्रि को सोते समय अथवा यात्रा आरम्भ करते समय पाठ करना चाहिए इससे उस व्यक्ति के सारे भय दूर हो जाते हैं; क्योंकि हनुमानजी को ‘संकटमोचन’ कहा जाता है।भगवान श्रीराम ने भी संकट-समुद्र को हनुमानजी की सहायता से पार किया था। –कलिकाल में विशेषकर युवकों व बच्चों में हनुमानजी की उपासना अत्यन्त आवश्यक है। क्योंकि हनुमानजी बुद्धि, बल और वीर्य प्रदान कर भक्तों की रक्षा करते हैं। हनुमानजी के बारह नामों का जप उनकी उपासना का सबसे सरल रूप है।–हनुमानजी के इन बारह नामों का जाप करते रहने से दरिद्रता और दु:खों का दहन होता है क्योंकि हनुमानजी अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता हैं। –इन नामों के जप से समस्त अमंगलों का नाश होता है। परिवार में दीर्घकाल तक सुख-शान्ति रहती है और मनुष्य के सभी मनोरथों की पूर्ति होती है। –मनुष्य को राजदरबार अर्थात् सरकारी झंझटों से मुक्ति मिल जाती है।–इन बारह नामों के उच्चारण करने से भूत-प्रेत पिशाच, यक्षराक्षस आदि भाग जाते हैं। –इन नामों के स्मरण करने से मनुष्य की मानसिक दुर्बलता दूर होती है। –हनुमानजी की नामोपासना करने से साधक में भी हनुमानजी के गुण–शूरवीरता, दक्षता, बल, धैर्य, विद्वता, नीतिज्ञान व पराक्रम आदि आ जाते हैं।–हनुमानजी के नामजप से मनुष्य बुद्धि, बल, कीर्ति, निर्भीकता, आरोग्य और वाक्यपटुता आदि प्राप्त करता है। –हनुमानजी भक्तों को रात-दिन कृपा का दान देते रहते हैं, उनके भय को मिटाते और क्लेशों को हर लेते हैं–नाशै रोग हरै सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत वीरा।।–इन बारह नामों के जप से दुष्टों और वैरियों का अंत हो जाता है और मनुष्य की हर तरह से रक्षा होती है। –हनुमानजी समस्त विघ्नों का निवारण कर आश्रितजनों का मन प्रसन्न कर देते हैं।मंगल-मूरत मारुत-नंदन। सकल-अमंगल मूल-निकंदन। जय सियाराम जय जय हनुमान।।*

हनुमानजी को तत्काल प्रसन्न करने के लिये उनके बारह नामों की स्तुति करें ।

By वनिता कासनियां पंजाब

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌।

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

भावार्थ:-अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत (सुमेरु) के समान कान्तियुक्त शरीर वाले, दैत्य रूपी वन (को ध्वंस करने) के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथजी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान्‌जी को मैं प्रणाम करता हूँ॥

हनुमानजी से बड़ा भगवान का दूसरा कोई भक्त नहीं है। हनुमानजी अशरण की शरण, दीनजनों के सहाय, मंगलकारी और संकटहारी हैं। भक्तों के कष्ट से व्याकुल होकर उनके दु:ख-दारिद्रय, आधि-व्याधि तथा समस्त विपत्तियों को दूर करने के लिए वे सदा तैयार रहते हैं; इसलिए जो लोग हनुमानजी के नामजप का आश्रय लेते हैं वे उनकी कृपा से निहाल हो जाते हैं।

आनन्दरामायण में दी गयी हनुमानजी के बारह नामों की स्तुति अद्भुत चमत्कारी हैं। इनका नित्य पाठ-स्मरण करने से मनुष्य कठिन-से-कठिन परिस्थितियों से ऐसे निकल जाता है जैसे गाय के खुर से बने गड्डे को लांघा हो। आवश्यकता केवल हनुमानजी और उनके नामों में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखने की है। आनन्दरामायण में दी गयी हनुमानजी के बारह नामों की स्तुति ।

हनुमानंजनीसूनुर्वायुपुत्रो महाबल:।

रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिंगाक्षोऽमितविक्रम:।। उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशन:। लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।।

एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:।

स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च य: पठेत्।।

तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्।

राजद्वारे गह्वरे च भयं नास्ति कदाचन।। (आनन्दरामायण ८।१३।८-११)

हनुमानजी के बारह नाम और उनका अर्थ इस स्तुति में दिए गए बारह नाम हनुमानजी के गुणों को दर्शाते हैं। श्रीराम और सीताजी के लिए हनुमानजी ने जो सेवाकार्य किया, उन्हीं का वर्णन इन नामों में हैं–

1. हनुमान–इन्द्र के वज्र से जिनकी बायीं हनु (ठुड्डी) टूट गयी है, उस टूटी हुई विशेष हनु के कारण वे ‘हनुमान’ कहलाते हैं।

2. अंजनीसूनु–कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को प्रदोषकाल में अंजनादेवी के गर्भ से हनुमानजी का जन्म हुआ था इसलिए हनुमानजी ‘अंजनीसूनु’, ‘आंजनेय’ या ‘अंजनीसुत’ कहलाते हैं।

3. वायुपुत्र–हनुमानजी वायुदेव के मानस औरस पुत्र हैं, इसलिए उन्हें ‘वातात्मज’, ‘पवनपुत्र’, ‘वायुनन्दन’ और ‘मारुति’ नामों से जाना जाता है।

4. महाबल–हनुमानजी अत्यन्त बलशाली हैं। श्रीरामजी ने हनुमानजी के बल का अगस्त्यमुनि से वर्णन करते हुए कहा–’रावण और वाली के बल की कहीं तुलना नहीं है; परन्तु मेरा विचार है कि दोनों का बल भी हनुमानजी के बल की बराबरी नहीं कर सकता।’

5. रामेष्ट–हनुमानजी भगवान श्रीरामजी के प्रिय भक्त हैं।

6. फाल्गुनसख–फाल्गुन का अर्थ है अर्जुन और सख का अर्थ है मित्र अर्थात् अर्जुन के मित्र। महाभारतयुद्ध के समय हनुमानजी अर्जुन के रथ की ध्‍वजा पर विराजित थे। उन्‍होंने अर्जुन की सहायता की इसलिए उन्‍हें अर्जुन का मित्र कहा गया है।

7. पिंगाक्ष–श्रीहनुमान के नेत्र थोड़ी लालिमा से युक्त पिंग (पीले) रंग के हैं।

8. अमितविक्रम–अमित का अर्थ है बहुत अधिक और विक्रम का अर्थ है पराक्रमी। हनुमानजी ने अपने पराक्रम के बल पर ऐसे कार्य किए जिन्‍हें करना देवताओं के लिए भी कठिन था इसलिए उन्‍हें अमितविक्रम कहा गया है। ब्रह्मवैवर्तपुराण में हनुमानजी ने अपने पराक्रम के विषय में स्वयं गर्जना की है–’मैं इस विशाल लंका को वानरी के बच्चे के समान छोटा समझता हूँ। समुद्र को मूत्र के समान, समस्त पृथ्वी को छोटे मिट्टी के पात्र (सकोरे) के समान तथा असंख्य सैनिकों से युक्त रावण को चींटियों के झुंड के तुल्य मानता हूँ।’

9. उदधिक्रमण–उदधिक्रमण का अर्थ है समुद्र को लांघने (अतिक्रमण करने) वाले। मनुष्य को जीवन में हर कदम पर संघर्ष करना पड़ता है। संघर्ष से भयभीत होने वाला व्यक्ति विजय से पहले ही पराजय स्वीकार कर लेता है। परन्तु प्रभु-विश्वासी मनुष्य को इन संघर्षों की लहरों पर भी आनन्द का संगीत सुनाई देता है। रामदूत हनुमान द्वारा समुद्र लांघने का कार्य हमारे मन में संघर्षों पर विजय पाने की प्रेरणाएं जगाता है।

10. सीताशोकविनाशन–माता सीता के शोक का निवारण करने के कारण हनुमानजी को सीताशोकविनाशन कहा जाता है।

11. लक्ष्मणप्राणदाता–जब रावण के पुत्र इंद्रजीत (मेघनाद) ने शक्ति का उपयोग कर लक्ष्‍मण को मूर्च्छित कर दिया, तब हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर आए थे। उसी बूटी के प्रभाव से लक्ष्‍मण को होश आया था; इसलिए हनुमानजी को लक्ष्‍मणप्राणदाता भी कहा जाता है।

12. दशग्रीवदर्पहा–दशग्रीव यानी रावण और दर्पहा यानी घमंड तोड़ने वाला। दशग्रीवदर्पहा का अर्थ है रावण का घमंड तोड़ने वाला। हनुमानजी ने लंका जाकर सीताजी का पता लगाया और रावण के पुत्र अक्षयकुमार का वधकर लंकादहन किया। इस प्रकार हनुमानजी ने कई बार रावण का घमंड तोड़ा था। इसलिए इनको दशग्रीवदर्पहा भी कहा जाता है।

बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम

हनुमानजी के बारह नामों के पाठ का फल जब मन किसी अज्ञात भय से घबराता हो, किसी अनहोनी की आशंका हो या कोई भीषण संकट उपस्थित हो गया हो तो हनुमानजी के इन बारह नामों का प्रात:काल सोकर उठने पर या रात्रि को सोते समय अथवा यात्रा आरम्भ करते समय पाठ करना चाहिए इससे उस व्यक्ति के सारे भय दूर हो जाते हैं; क्योंकि हनुमानजी को ‘संकटमोचन’ कहा जाता है।

भगवान श्रीराम ने भी संकट-समुद्र को हनुमानजी की सहायता से पार किया था। –कलिकाल में विशेषकर युवकों व बच्चों में हनुमानजी की उपासना अत्यन्त आवश्यक है। क्योंकि हनुमानजी बुद्धि, बल और वीर्य प्रदान कर भक्तों की रक्षा करते हैं। हनुमानजी के बारह नामों का जप उनकी उपासना का सबसे सरल रूप है।

–हनुमानजी के इन बारह नामों का जाप करते रहने से दरिद्रता और दु:खों का दहन होता है क्योंकि हनुमानजी अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता हैं। –इन नामों के जप से समस्त अमंगलों का नाश होता है। परिवार में दीर्घकाल तक सुख-शान्ति रहती है और मनुष्य के सभी मनोरथों की पूर्ति होती है। –मनुष्य को राजदरबार अर्थात् सरकारी झंझटों से मुक्ति मिल जाती है।

–इन बारह नामों के उच्चारण करने से भूत-प्रेत पिशाच, यक्षराक्षस आदि भाग जाते हैं। –इन नामों के स्मरण करने से मनुष्य की मानसिक दुर्बलता दूर होती है। –हनुमानजी की नामोपासना करने से साधक में भी हनुमानजी के गुण–शूरवीरता, दक्षता, बल, धैर्य, विद्वता, नीतिज्ञान व पराक्रम आदि आ जाते हैं।

–हनुमानजी के नामजप से मनुष्य बुद्धि, बल, कीर्ति, निर्भीकता, आरोग्य और वाक्यपटुता आदि प्राप्त करता है। –हनुमानजी भक्तों को रात-दिन कृपा का दान देते रहते हैं, उनके भय को मिटाते और क्लेशों को हर लेते हैं–नाशै रोग हरै सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत वीरा।।

–इन बारह नामों के जप से दुष्टों और वैरियों का अंत हो जाता है और मनुष्य की हर तरह से रक्षा होती है। –हनुमानजी समस्त विघ्नों का निवारण कर आश्रितजनों का मन प्रसन्न कर देते हैं।

मंगल-मूरत मारुत-नंदन। सकल-अमंगल मूल-निकंदन। जय सियाराम जय जय हनुमान।।*


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

श्री हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़ना चाहिए?ब (ाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब) १. हनुमान चालीसा का 100 बार जप करने पर आपको सभी भौतिकवादी चीजों से मुक्ति मिल जाती है२.हनुमान चालीसा का 21 बार जाप करने से धन में वृद्धि होती है।३. हनुमान चालीसा का 19 बार जाप करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।४.हनुमान चालीसा का 7 बार जाप करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।५.हनुमान चालीसा का 1 बार जप करने से भगवान हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है और आपको हर स्थिति में विजयी होने में मदद मिलती है।६.अगर आप अपने जीवन में एक साथ कई परेशानियों से परेशान है और हनुमान जी की विशेष कृपा पाना चाहते है तो सुबह के 4 बजे 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करे७.मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का 1 बार जप करने से हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है और मंगल दोष, साढ़े साती जैसे हर दोष का निवारण होता है।८.भगवान हनुमान जी का नाम जप करने से आपके आसपास एक सकारात्मक आभा का निर्माण होता है।९.राम नाम का जप या राम हनुमान का कोई भी राम भजन, हनुमान जी को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है क्योंकि वे भगवान श्री राम जी से सबसे अधिक प्रेम करते हैं।१०.यदि आप एक विशेष दोहा का जप करते हैंबल बुधि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकरयदि अध्ययन से पहले 11 बार इस दोहा का जप 21 दिनों तक लगातार कर लिया जाए तो अध्ययन के प्रति विधार्थियों की एकाग्रता बढ़ेगी११.भूत पिशाच निकट नहीं आवै महावीर जु नाम सुनावेअगर आप इस श्लोक का 27 बार जाप करेंगे तो आपके दिल से अनुचित डर खत्म हो जाएगा।और भी बहुत से लाभ आपको खास दोहा और चौपाई का जाप करने से मिलेगा।वनिता कासनियां पंजाबकहा जाता है कि हनुमान चालीसा के हर श्लोक और दोहे का 108 बार जाप करना भी बहुत अच्छा होता है।जय श्री राम 🙏हर हर महादेव 🙏🙏

श्री हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़ना चाहिए? बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब १. हनुमान चालीसा का 100 बार जप करने पर आपको सभी भौतिकवादी चीजों से मुक्ति मिल जाती है २.हनुमान चालीसा का 21 बार जाप करने से धन में वृद्धि होती है। ३. हनुमान चालीसा का 19 बार जाप करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। ४.हनुमान चालीसा का 7 बार जाप करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ५.हनुमान चालीसा का 1 बार जप करने से भगवान हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है और आपको हर स्थिति में विजयी होने में मदद मिलती है। ६.अगर आप अपने जीवन में एक साथ कई परेशानियों से परेशान है और हनुमान जी की विशेष कृपा पाना चाहते है तो सुबह के 4 बजे 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करे ७.मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का 1 बार जप करने से हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है और मंगल दोष, साढ़े साती जैसे हर दोष का निवारण होता है। ८.भगवान हनुमान जी का नाम जप करने से आपके आसपास एक सकारात्मक आभा का निर्माण होता है। ९.राम नाम का जप या राम हनुमान का कोई भी राम भजन, हनुमान जी को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है क्योंकि वे भगवान श्री राम...

सुंदरकांड का पाठ किस तरीके से करना चाहिए By वनिता कासनियां पंजाब ? जय श्री राम।आपने सुंदरकांड पाठ के बारे में पूछा शायद मैं उसका जवाब दे पाऊंगी क्योंकि मैं सुंदरकांड का पाठ प्रतिदिन करती हूं। सुंदरकांड तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस का एक कांड है जिसमें हनुमान जी की महिमा का वर्णन है।सुंदरकांड का पाठ पढ़ने से हमें बहुत ही अधिक सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है और हमें हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है हमारे शरीर में हमें फुर्ती महसूस होती है और हम बहुत हद तक हमारी बीमारियों को ठीक हुआ महसूस करते हैं यह एक बहुत ही बढ़िया पाठ है।सुंदरकांड के पाठ में 60 दोहे हैं इसे पढ़ने में हमें कम से कम 1 घंटे का समय लगता है अगर हम इसे ध्यान से पढ़ें तो हमें हनुमान जी ने जो जो कार्य राम जी के लिए किए थे उसके बारे में हमें पता चल जाता है। हम इसे नित्य पढ़ सकते हैं और अगर हम चाहे तो इसे सप्ताह में एक बार मंगलवार या शनिवार के दिन भी पढ़ सकते हैं क्योंकि मंगलवार और शनिवार हनुमान जी के दिन होते हैं तो इस दिन सुंदरकांड का पाठ पढ़ने का बहुत अधिक महत्व है।इसे पढ़ने के लिए हमें ज्यादा कुछ नहीं करना है बस हमें हनुमान जी की तस्वीर के सामने एक तांबे के कलश में पानी रखना है और हनुमान जी के लिए कुछ भी प्रसाद चाहे गुड़ का टुकड़ा भी क्यों ना हो रखना है फिर हमें अगर हमारे पास फूल हो तो हनुमान जी के तस्वीर के पास फूल चढ़ा देना चाहिए और एक दीया लगाकर हमें सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए सुंदरकांड के पाठ को हमें अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए जब तक हो सके इसे पूरा पढ़ना चाहिए और सुंदरकांड के पाठ के अंत में हमें हनुमान चालीसा पढ़ कर प्रभु को ध्यान में रखकर अगर हमारी कुछ भी मन में इच्छा हो तो आप उन्हें कह सकते हैं। अब हम वह हनुमान जी की तस्वीर के पास रखा हुआ जल ग्रहण कर लेना है यह जल अमृत के समान हो जाता है इस पानी को पीने से हमारे शरीर में बहुत ही उर्जा का अनुभव होता है और हमारे शरीर एक कष्टों का निवारण होता है।हम जिस तरीके से सुंदरकांड का पाठ करते हैं उस तरीके को आपसे साझा कर दिया है अगर इसमें कुछ भी त्रुटि हो तो आप सभी से माफी चाहते हैं और अगर आपको इससे संबंधित कुछ भी पुछना हो तो आप हमसे बेहिचक पूछ सकते हैं।मैं प्रतिदिन यह वाली सुंदरकांड का पाठ करती हूं यह 45 मिनट में संपूर्ण हो जाती है जय श्री राम 🙏🚩

सुंदरकांड का पाठ किस तरीके से करना चाहिए By वनिता कासनियां पंजाब ? जय श्री राम। आपने सुंदरकांड पाठ के बारे में पूछा शायद मैं उसका जवाब दे पाऊंगी क्योंकि मैं सुंदरकांड का पाठ प्रतिदिन करती हूं। सुंदरकांड तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस का एक कांड है जिसमें हनुमान जी की महिमा का वर्णन है। सुंदरकांड का पाठ पढ़ने से हमें बहुत ही अधिक सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है और हमें हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है हमारे शरीर में हमें फुर्ती महसूस होती है और हम बहुत हद तक हमारी बीमारियों को ठीक हुआ महसूस करते हैं यह एक बहुत ही बढ़िया पाठ है। सुंदरकांड के पाठ में 60 दोहे हैं इसे पढ़ने में हमें कम से कम 1 घंटे का समय लगता है अगर हम इसे ध्यान से पढ़ें तो हमें हनुमान जी ने जो जो कार्य राम जी के लिए किए थे उसके बारे में हमें पता चल जाता है। हम इसे नित्य पढ़ सकते हैं और अगर हम चाहे तो इसे सप्ताह में एक बार मंगलवार या शनिवार के दिन भी पढ़ सकते हैं क्योंकि मंगलवार और शनिवार हनुमान जी के दिन होते हैं तो इस दिन सुंदरकांड का पाठ पढ़ने का बहुत अधिक महत्व है। इसे पढ़ने के लिए हमें ज...

मेरे मन बस गया है यो अंजनी का हनुमान, अंजनी माँ का राज दुलारा, पवन पिता का पुत्र ये प्यारा म्हारा से भगवन, मेरे मन बस गया है यो अंजनी का हनुमान लाल लंगोटा हाथ में सोटा, लाल लंगोटा हाथ में सोटा मोटा से साहूकार, मेरे मन बस गया है यो अंजनी का हनुमान, मंगल का दिन शुभ का होसे, मिल्या अमर वरदान मिल्या अमर वरदान, मेरे मन बस गया है यो अंजनी का हनुमान,। 4464005860401745