सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

What can be the most beautiful and precious picture in the world? can you share?By social worker Vanita Kasani PunjabWe can't even imagine the darkness in lifeThe Sun is a storehouse of energy and light,Aye

हम जीवन में अंधकार की कल्पना भी नहीं कर सकते

सूर्य ऊर्जा और प्रकाश का भण्डार है,

ऐसे में अगर भगवन हनुमानजी, भगवन सूर्य को एक

खाने का फल समझकर निगल जाएँ तो क्या होगा

बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ।
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ।

संकट मोचन हनुमान अष्टक

बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ।
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ।
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो ।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो ।
अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु ,बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो।
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ।
रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो ।
चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ।
बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।
आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो ।
रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो ।
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो ।
बंधू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।

http://kheti4.blogspot.com/2021/05/has-there-been-postmortem-of-corpse-of.html
जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो ।
काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो ।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो ।
दोहा
लाल देह लाली लसे , अरु धरि लाल लंगूर ।
वज्र देह दानव दलन , जय जय जय कपि सूर ।।


(Photo gogle)

(Source Google)

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Anjana was the mother of Hanuman ji. She was the wife of the monkey king Kesari. Going to give a little information about them.There was a nymph named Punjik Thala who danced in the court of Indra, it was the same nymph who

हनुमान  जी की माता थी अंजना। वह वानर  राजा केसरी   बाल वनिता महिला आश्रम की पत्नी थी। उनके बारे में थोड़ी जानकारी देने जा रहे हैैं। पुंजिक थला नाम की एक अप्सरा थी जो इंद्र के दरबार में नृत्य किया करती थी यह वही अप्सरा थी जो समुद्र मंथन के समय में निकली थी उस समय तीन अप्सराएं निकली थी उनमें से पुंजिक थला भी एक अप्सरा पुंजत्थला एक बार धरती लोक में आई और उन्होंने महा ऋषि दुर्वासा जो एक ऋषि थे और वह तपस्या कर रहे थे वह एक नदी के किनारे बैठे हुए थे और ध्यान मुद्रा में थे पुंजत्थल ने उन पर बार-बार पानी फेंका जिससे उनकी तपस्या भंग हो गई और तब उन्होंने पुंजिक थला को श्राप दे दिया कि तुम इसी समय वानरी हो जाओ और पुंजिक थला उसी समय वानरी बन गई और पेड़ों पर इधर उधर घूमने लगी देवताओं के बहुत विनती करने के बाद ऋषि ने उन्हें बताया की इनका दूसरा जन्म होगा और तुम वानरी ही रहोगी लेकिन अपनी इच्छा के अनुसार तुम अपना रूप बदल सकोगी। तभी केसरी सिंह नाम के एक राजा वहां पर एक मृग का शिकार करते हुए आए वह मृग घायल था और वह ऋषि के आश्रम में छुप गया ऋषि ने राजा केसरी से कहा कि तुम मेरे ...

जीवन में बुराई अवश्य हो सकती है मगर जीवन बुरा कदापि नहीं हो सकता,बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब 🌹🙏🙏🌹 जीवन एक अवसर है श्रेष्ठ बनने का, श्रेष्ठ करने का, श्रेष्ठ पाने का, जीवन की दुर्लभता जिस दिन किसी की समझ में आ जाए उस दिन से कोई भी व्यक्ति जीवन का दुरूपयोग नहीं कर सकता... 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿 जीवन वो फूल है जिसमें काँटे तो बहुत हैं, मगर सौन्दर्य की भी कोई कमी नहीं, ये और बात है कुछ लोग काँटो को कोसते रहते हैं और कुछ लोग सौन्दर्य का आनन्द लेते हैं... जीवन को बुरा सिर्फ उन लोगों के द्वारा कहा जाता है जिनकी नजर फूलों की बजाय काँटो पर ही रहती है, जीवन का तिरस्कार वे ही लोग करते हैं जिनके लिए यह मूल्यहीन है... 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿 जीवन में सब कुछ पाया जा सकता है मगर सब कुछ देने पर भी जीवन को पाया नहीं जा सकता, जीवन का तिरस्कार नहीं परंतु इससे प्यार करना चाहिए, जीवन को बुरा कहने की अपेक्षा जीवन की बुराई मिटाने का प्रयास करना ही समझदारी है... 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌿🍂🌿🍂🌿🍂🌿🍂🌿🍂🌿🍂🌿🍂🌿 ''जय श्री राधे कृष्ण'' कितने करिश्माई हैं ये शब्द... बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम में बे सहारा को दान से...💕ताज़गी का एह्सास होता है... 💕💞💞💞💞मानसिक बल मिलता है... 💕गम कोसो दूर चले जाता है... 💕💞💞💞मन हलका हो जाता है... 💕मन की पीड़ा शांत हो जाती है...💕💞💞💞नकारात्मक विचार आते नहि...💕बिगड़े काम बनने लगते हैं... 💕हर सपने साकार करने की शक्ति मिलती हैं... 💕 💞💞💞💞#जय #बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की...💕#मानव हो मानव का प्यारा एक दूजे का बनो #

जीवन में बुराई अवश्य हो सकती है मगर जीवन बुरा कदापि नहीं हो सकता, बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाब  🌹🙏🙏🌹 जीवन एक अवसर है श्रेष्ठ बनने का, श्रेष्ठ करने का, श्रेष्ठ पाने का, जीवन की दुर्लभता जिस दिन किसी की समझ में आ जाए उस दिन से कोई भी व्यक्ति जीवन का दुरूपयोग नहीं कर सकता... 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿🍁🌿            जीवन वो फूल है जिसमें काँटे तो बहुत हैं, मगर सौन्दर्य की भी कोई कमी नहीं, ये और बात है कुछ लोग काँटो को कोसते रहते हैं और कुछ लोग सौन्दर्य का आनन्द लेते हैं...             जीवन को बुरा सिर्फ उन लोगों के द्वारा कहा जाता है जिनकी नजर फूलों की बजाय काँटो पर ही रहती है, जीवन का तिरस्कार वे ही लोग करते हैं जिनके लिए यह मूल्यहीन है... 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿            जीवन में सब कुछ पाया जा सकता है मगर सब कुछ देने पर भी जीवन को पाया नहीं जा सकता, जीवन का तिरस्कार नहीं परंतु इससे प्यार करना ...

,। ‼️💖💖जय श्री राम जय जय श्री हनुमान 💖💖‼️🌳🌳🌳🌳🌳राम हनुमान मिलन की कहानी- जानिए कैसे हुई हनुमान जी और प्रभु श्री राम की प्रथम भेंट :- by समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब:💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫एक बार हनुमान जी ऋष्यमूक पर्वत की एक बहुत ऊंची चोटी पर बैठे हुए थे। उसी समय भगवान श्रीराम चंद्र जी सीता जी की खोज करते हुए लक्ष्मण जी के साथ ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुंचे। ऊंची चोटी पर से वानरों के राजा सुग्रीव ने उन लोगों को देखा। उसने सोचा कि ये बाली के भेजे हुए दो योद्धा हैं, जो मुझे मारने के लिए हाथ में धनुष-बाण लिए चले आ रहे हैं।💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫दूर से देखने पर ये दोनों बहुत बलवान जान पड़ते हैं। डर से घबरा कर उसने हनुमान जी से कहा, ‘‘हनुमान! वह देखो, दो बहुत ही बलवान मनुष्य हाथ में धनुष-बाण लिए इधर ही बढ़े चले आ रहे हैं। लगता है, इन्हें बाली ने मुझे मारने के लिए भेजा है। ये मुझे ही चारों ओर खोज रहे हैं। तुम तुरंत तपस्वी ब्राह्मण का रूप बना लो और इन दोनों योद्धाओं के पास जाओ तथा यह पता लगाओ कि ये कौन हैं और यहां किसलिए घूम रहे हैं। अगर कोई भय की बात जान पड़े तो मुझे वहीं से संकेत कर देना। मैं तुरंत इस पर्वत को छोड़कर कहीं और भाग जाऊंगा।’’💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫सुग्रीव को अत्यंत डरा हुआ और घबराया देखकर हनुमान जी तुरंत तपस्वी ब्राह्मण का रूप बनाकर भगवान श्रीरामचंद्र और लक्ष्मण जी के पास जा पहुंचे। उन्होंने दोनों भाइयों को माथा झुकाकर प्रणाम करते हुए कहा, ‘‘प्रभो! आप लोग कौन हैं? कहां से आए हैं? यहां की धरती बड़ी ही कठोर है। आप लोगों के पैर बहुत ही कोमल हैं। किस कारण से आप यहां घूम रहे हैं? आप लोगों की सुंदरता देखकर तो ऐसा लगता है-जैसे आप ब्रह्मा, विष्णु, महेश में से कोई हों या नर और नारायण नाम के प्रसिद्ध ऋषि हों। आप अपना परिचय देकर हमारा उपकार कीजिए।’’💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫हनुमान जी की मन को अच्छी लगने वाली बातें सुनकर भगवान श्री रामचंद्र जी ने अपना और लक्ष्मण का परिचय देते हुए कहा कि, ‘‘राक्षसों ने सीता जी का हरण कर लिया है। हम उन्हें खोजते हुए चारों ओर घूम रहे हैं। हे ब्राह्मण देव! मेरा नाम राम तथा मेरे भाई का नाम लक्ष्मण है। हम अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के पुत्र हैं। अब आप अपना परिचय दीजिए।’’💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫भगवान श्रीरामचंद्र जी की बातें सुनकर हनुमान जी ने जान लिया कि ये स्वयं भगवान ही हैं। बस वह तुरंत ही उनके चरणों पर गिर पड़े। श्री राम ने उठाकर उन्हें गले से लगा लिया।💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫हनुमान जी ने कहा, ‘‘प्रभो! आप तो सारे संसार के स्वामी हैं। मुझसे मेरा परिचय क्या पूछते हैं? आपके चरणों की सेवा करने के लिए ही मेरा जन्म हुआ है। अब मुझे अपने परम पवित्र चरणों में जगह दीजिए।’’💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫भगवान श्री राम ने प्रसन्न होकर उनके मस्तक पर अपना हाथ रख दिया। हनुमान जी ने उत्साह और प्रसन्नता से भरकर दोनों भाइयों को उठाकर कंधे पर बैठा लिया। सुग्रीव ने उनसे कहा था कि भय की कोई बात होगी तो मुझे वहीं-से संकेत करना। हनुमान जी ने राम लक्ष्मण को कंधे पर बिठाया-यही सुग्रीव के लिए संकेत था कि इनसे कोई भय नहीं है। उन्हें कंधे पर बिठाए हुए ही वह सुग्रीव के पास आए और उनसे सुग्रीव का परिचय कराया। भगवान श्री राम ने सुग्रीव के दुख और कष्ट की सारी बातें जानीं। उसे अपना मित्र बनाया और दुष्ट बाली को मार कर उसे किष्किंधा का राजा बना दिया। इस प्रकार हनुमान जी की सहायता से सुग्रीव का सारा दुख दूर हो गया। #जय_श्री_राम🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖